अघोर तंत्र साधना

एक आम आदमी अघोरी शब्द से ही काँप उठता है| नशे में डूबी लाल-लाल आँखें, हाथ में चिमटा, एक कंधे पर झोला. झोले में खोपड़ी और हड्डी, रोंगटे खड़ी कर देने वाली इस तस्वीर के साथ-साथ जनमानस में इन्हें लेकर कई धारणाएं प्रचलित हैं. जैसे –ये मुर्दे का मांस खाते हैं, श्मशान में रहते हैं, गंदगी में रहना इन्हें पसंद है, जिसे यह शाप दे दें वह जीवन भर उससे मुक्त नहीं हो सकता, ये पिशाचों और चुडैलों को अपना गुलाम बना कर रखते हैं| पुराने जमाने की एक कहावत भी है –अघोरी से नहीं उसके थूक से बचो| कुल मिलाकर अघोरी एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में कोई कुछ नहीं जानता लेकिन हर कोई जानता है|

अघोर तंत्र साधना
अघोर तंत्र साधना

अघोरपंथ क्या है

दरअसल यह साधना का वाम पंथ माना जाता है| यानी ईश्र्वर को पाने के जो भी सामान्य तरीके है उसके ठीक उलट| इस मार्ग पर चलने वाला सबसे पहले घृणा और भय को वश में करता है| वह श्मशान जैसी जगह पर सहजता से रहता है. वह मल, सड़े मुर्दे भी खा सकता है क्योंकि वे इन्हें सहज और सामान्य मानते हैं| यह ज्यादातर शिव और काली की साधना करते हैं| मान्यता है कि स्वयं शिव से इस साधना की उत्पत्ति हुई है| दत्तात्रेय इस साधना के मूल गुरु माने जाते हैं, वैसे दत्तात्रेय भी भगवान् शिव के ही स्वरूप हैं| अघोर पंथ में प्रचलित विशवास के अनुसार दत्तात्रेय में ब्रम्हा विष्णु और महेश तीनों शक्तियों का अंश निहित है|

भारत में कुछ धार्मिक स्थल अघोर साधना के लिए प्रसिद्ध है जैसे बनारस, गुजरात का गिरनार पर्वत आदि| ये मुख्य रूप से तीन प्रकार की साधना करते हैं –शिव साधना, श्मशान साधना और शव साधना| इस तरह की साधना प्रायः कामाख्या पीठ श्मशान, त्र्यम्बकेश्वर श्मशान, तारा पीठ स्मशान और उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ स्मशान में की जाती है| वैसे मुख्य रूप से अघोरपंथ के दस तांत्रिक पीठ आज भी सक्रिय है|

अघोर शाबर मन्त्र

शाबर मंत्र प्राचीन काल से भारत में प्रचिलित  है| इसके शब्द बहुत लय में अथवा छंद में नहीं होते| आड़े-टेढ़े शब्दों में स्थानीय बोली. हिंदी-उर्दू सब मिला जुला होता है लेकिन जिसने इसे सिद्ध कर लिया वह जानता है कि ये मंत्र किसी अचूक शस्त्र से कम नहीं| वैसे अघोरियों का जीवन ही तंत्र साधना को समर्पित होता है| इनकी जीवन शैली कोई आम इंसान अपना भी नहीं सकता| लेकिन रोजमर्रा के जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए कुछ मन्त्रों को आम इंसान भी अपना सकता है, बशर्ते  कि उसके प्रति कोई उपेक्षा, हास्य अविश्वास का भाव न हो – उदाहरण के लिए अगर किसी को कोई रोग लम्बे अरसे से परेशान कर रहा हो, लाख कोशिशों के बाद बीमारी बढ़ती ही जा रही हो तो अघोरियों में प्रचलित इस शाबर मंत्र को उपयोग में लाया जा सकता है|

मंत्र

ओम नमो आदेश गुरु/घोर-घोर काजी की कुरआन घोर/

मुल्ला की बांग घोर/ रेगड की कुंड घोर

घोबी की चुंड घोर/ पाना पीपल का घोर

गुरु की घोर बिखेरता चल/पर की घोर बैठाता चल

बज्र की किवाड़ जोड़ता चल/सार की किवाड़ तोड़ता चल

इनको बंद करता चल –

भूत को, देव को, दानव को, दुष्ट को, मुश्ट को, ताप को पीड़ा को,

बंद कर/बंद कर

जांघ की जाडी बंद कर/ कटि की कड़ी बंद कर/पेट की पीड़ा बंद कर/

छाती का शूल बंद कर/ सर की सीस बंद कर

बहत्तर रोम में नौ नाडी, इंड में पिंड में दखल कर

मनसा राम सेबडा बंगाल का/ आकर काम मेरा सिद्ध न करे

तो उस्ताद गुरु लाजे/ शब्द साँचा पिंड कांचा फुरौ मंत्र इश्वरी वाचा

कैसे करें

किसी भी रविवार के दिन शिव मंदिर में धूप दीप अगरबत्ती जलाएं| प्रसाद चढ़ाएं, किसी भी अघोरी को तम्बाकू या गांजे से भरी हुई चिलम अर्पित करें| इसके बाद उपर्युक्त मंत्र का सत्ताईस बार सत्ताईस दिनों तक प्रतिदिन जाप करें| सत्ताईस दिन की साधना के बाद यह मंत्र सिद्ध हो जाता है| अब किसी मोरपंख या लोहे की कील लेकर सात बार मंत्र पढ़े और  रोगी को  झाडें| ऐसा लगातार तीन दिनों तक सुबह और शाम करना चाहिए| इससे रोगी को आराम मिलता है और वह स्वस्थ हो जाता है|

अघोरी अचूक वशीकरण मंत्र

वैसे तो हमारे समाज में वशीकरण के कई तरीके आजमाए जाते हैं लेकिन अघोरियों की क्रिया विधि और उनके  तरीके कुछ अलग होते हैं| इसलिए इन टोटकों को आजमाने से पहले अगर किसी अघोरी का आशीर्वाद या मार्गदर्शन ले लिया जाए तो वह ज्यादा प्रभावशाली होता है| वैसे इस चक्कर किसी गलत वाममार्गी के चक्कर में पड़ने का भय भी रहता है| जैसे हमारी दुनिया में अच्छे और बुरे लोग होते हैं उसी प्रकार अघोरी भी सच्चे और पाखंडी हो सकते हैं| कहते हैं सच्चा अघोरी किस्मत से ही मिलता है| इसलिए किसी टोटके के लिए बात करने से पहले उसके बारे में पड़ताल कर लें वरना जीवन भर पछताना पड़ सकता है –

यह टोटका किसी भी सोमवार को रात के ग्यारह बजे के बाद शुरू करें | नहा धो कर लाल कपड़ा पहने, किसी पीढ़े पर शिवजी की प्रतिमा/शिवलिंग/ तस्वीर स्थापित करें| स्टील या लोहे से बनी एक थाली ले लें, अब इस पर काजल से ओम अघोरेभ्यों घोरेभ्यों नमः लिख दें| पुनः जिस इंसान को वशीभूत करना हो उसके पहने हुए कपडे का टुकडा थाली के ऊपर बिछा दें| अब सिन्दूर या कुमकुम से उस इंसान का नाम लिख दें| पीढ़े पर जिसे वश में करना है उस इंसान का चित्र भी रखें| अब पांच मिनट शिव का ध्यान करें| रुद्राक्ष की माला पर निम्न मंत्र का जाप करें –

शिवे वश्ये हूँ/वश्ये (व्यक्ति का नाम)वश्ये हूँ वश्ये शिवे

वश्यमें वश्यमें वश्यमें फट स्वाहा|

यह मंत्र इक्यावन माला जाप करें| जाप पूरा होने के बाद ऋषि मुंडकेश तथा अघोरेश्वर शिव से याचना करें| बीच में कुछ अजीब अनुभूति हो सकती है जिस पर विचलित होने की आवश्यकता नहीं| उद्देश्य अगर नीचतापूर्ण नहीं है तो यह साधना सफल हो जाती है|

यह साधारण  मंत्र मात्र नहीं है बल्कि एक सम्पूर्ण साधना है, नीचतापूर्ण उद्देश्य से इसे न करें तो बेहतर| किसी अनुभवी सच्चे अघोरी का मार्गदर्शन मिल जाए तो सरलता से इसे पूर्ण किया जा सकता है|

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